मधुबन के किसान पुत्र शशि भूषण सिंह बने ग्लोबल कॉरपोरेट ट्रेनर
फार्च्यून 500 कंपनियों को दे रहे ट्रेनिंग
गरीब दर्शन/मोतिहारी।
कहते हैं कि जो चुपचाप मेहनत करता है, उसकी सफलता एक दिन शोर मचाती है। पूर्वी चंपारण के सुदूर गांव मधुबन प्रखंड के नौरंगीया निवासी शशि भूषण सिंह की कहानी कुछ ऐसी ही है। किसान परिवार में जन्मे शशि भूषण आज कॉरपोरेट जगत का एक जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं। देश ही नहीं, विदेशों की बड़ी कंपनियों के सीईओ, सीएफओ और वरिष्ठ अधिकारियों को वे कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, लीडरशिप और प्रोफेशनल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
शशि भूषण सिंह जिम कॉलिंस और शिवखेड़ा जैसे मोटिवेशनल गुरुओं को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव और मोतिहारी से पूरी की। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद बड़े सपनों के साथ वे दिल्ली पहुंचे और सीए की तैयारी शुरू की। दिल्ली में रहते हुए उनका परिचय कॉरपोरेट जगत से हुआ, जहां उन्हें एहसास हुआ कि अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी में महारत हासिल करने का संकल्प लिया और ब्रिटिश काउंसिल में दाखिला लिया। महंगी फीस के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनके पिता शंभू सिंह और माता बिंदू देवी ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। छह वर्षों तक ब्रिटिश काउंसिल में अध्ययन कर उन्होंने अंग्रेजी और पर्सनालिटी डेवलपमेंट में दक्षता हासिल की। आज वे भारत के साथ-साथ ब्रिटेन के लोगों को भी पर्सनालिटी और कॉरपोरेट ट्रेनिंग दे रहे हैं।
फार्च्यून 500 कंपनियों को दे रहे प्रशिक्षण
शशि भूषण सिंह का दावा है कि वे प्रॉक्टर एंड गैंबल, डेलॉइट, रिलायंस, गूगल और एप्पल जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। वे विशेष रूप से फार्च्यून 500 कंपनियों के अधिकारियों को एडवांस कम्युनिकेशन, कॉरपोरेट स्ट्रेटजी, लीडरशिप और प्रोफेशनल डेवलपमेंट की शिक्षा देते हैं। उनके कोर्स से कई कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स, युवा उद्यमी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
दो संस्थानों की स्थापना
उन्होंने नोएडा सेक्टर-2 और दिल्ली के लक्ष्मी नगर में “एसबीएमबी स्कूल ऑफ लैंग्वेज” और “वेरूम एग्जीक्यूटिव लीडरशिप” की स्थापना की है। ये संस्थान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित हो रहे हैं। यहां कॉरपोरेट अधिकारियों को न केवल बेहतर संवाद कौशल सिखाया जाता है, बल्कि कंपनी में नेतृत्व की भूमिका निभाने और स्वयं को प्रोफेशनली आगे बढ़ाने की रणनीतियां भी सिखाई जाती हैं। देश के अलावा विदेशों से भी अधिकारी इन कोर्सों से जुड़ रहे हैं।
40 बिलियन डॉलर का वैश्विक बाजार
कम्युनिकेशन, लीडरशिप और प्रोफेशनल डेवलपमेंट का अंतरराष्ट्रीय बाजार लगभग 40 बिलियन डॉलर का बताया जाता है, जिस पर अभी तक विदेशी ट्रेनर्स का वर्चस्व रहा है। शशि भूषण सिंह का कहना है कि वे इस क्षेत्र में भारतीय प्रतिभा का परचम लहराना चाहते हैं। वर्तमान में वे इस व्यवसाय से करीब 25 लाख रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य भविष्य में जिम कॉलिंस जैसे वैश्विक स्तर के लीडरशिप गुरु बनकर इस क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान हासिल करना है। मधुबन के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने की उनकी यात्रा आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई ।

