व्हाट्सएप नंबर हैक कर पैसे की मांग

व्हाट्सएप नंबर हैक कर पैसे की मांग

 साइबर अपराधियों का बढ़ता जाल

गरीब दर्शन / पटना

डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट ने जहां लोगों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी ठगी के नए रास्ते खोल दिए हैं। हाल के दिनों में व्हाट्सएप नंबर हैक कर पैसे की मांग करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर उनके व्हाट्सएप अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं और फिर उसी नंबर से उनके रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों से पैसे ऐंठते हैं। इस तरह की घटनाएं शहरी इलाकों के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामने आने लगी हैं।

कैसे होता है व्हाट्सएप अकाउंट हैक

साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से व्हाट्सएप अकाउंट हैक करते हैं। सबसे आम तरीका ओटीपी ठगी का है। अपराधी किसी जान-पहचान वाले की तरह बात करते हुए या किसी स्कीम, इनाम या जरूरी सूचना का झांसा देकर पीड़ित से व्हाट्सएप का ओटीपी मांग लेते हैं। जैसे ही ओटीपी साझा किया जाता है, अपराधी पीड़ित का अकाउंट अपने फोन में लॉग-इन कर लेते हैं। इसके अलावा फर्जी लिंक भेजकर, क्यूआर कोड स्कैन करवाकर या व्हाट्सएप वेब के जरिए भी अकाउंट हैक किए जा रहे हैं।
कई बार अपराधी पीड़ित की प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर किसी अन्य नंबर से भी लोगों को भ्रमित करते हैं। तकनीक की सीमित जानकारी रखने वाले लोग इस जाल में आसानी से फंस जाते हैं।

पैसे की मांग का तरीका

अकाउंट हैक होने के बाद अपराधी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। वे सबसे पहले पीड़ित की चैट लिस्ट में मौजूद करीबी लोगों को संदेश भेजते हैं। संदेश आमतौर पर इस तरह का होता है— “अभी बहुत इमरजेंसी है”, “थोड़े पैसे तुरंत भेज दो”, “मीटिंग में हूं, बाद में बात करूंगा”, या “UPI पर भेज दो, थोड़ी देर में लौटा दूंगा।” कई मामलों में अपराधी बार-बार दबाव बनाते हैं ताकि सामने वाला बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर दे।
चूंकि संदेश परिचित नंबर से आता है, इसलिए लोग उस पर शक नहीं करते और मदद के इरादे से पैसे भेज देते हैं। जब बाद में असली व्यक्ति से संपर्क होता है, तब ठगी का खुलासा होता है। कई पीड़ितों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा है।

कौन बन रहा है ज्यादा शिकार

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, गृहिणियां, छोटे दुकानदार और ऐसे लोग जो तकनीक के प्रति ज्यादा सतर्क नहीं हैं, इस तरह की ठगी का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ ही वहां भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अपराधी भावनात्मक संबंधों का फायदा उठाकर लोगों को जल्दबाजी में निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं।

पुलिस और साइबर सेल की चेतावनी

लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि व्हाट्सएप या कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कभी भी फोन, मैसेज या कॉल के जरिए ओटीपी नहीं मांगता। यदि किसी परिचित के नंबर से पैसे की मांग आए, तो सबसे पहले फोन कॉल कर या आमने-सामने बात कर उसकी पुष्टि जरूर करें।
साइबर सेल यह भी सलाह दे रही है कि लोग अपने व्हाट्सएप अकाउंट में Two-Step Verification (दो-स्तरीय सुरक्षा) जरूर चालू रखें, मजबूत पिन और पासवर्ड का इस्तेमाल करें और अनजान लिंक या क्यूआर कोड पर क्लिक या स्कैन न करें।

हैक होने पर क्या करें

अगर किसी व्यक्ति का व्हाट्सएप अकाउंट हैक हो जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सबसे पहले अपने परिचितों को अन्य माध्यम से सूचित करें कि आपका अकाउंट हैक हो गया है और किसी भी तरह के पैसे या लिंक पर भरोसा न करें। इसके बाद व्हाट्सएप की आधिकारिक सपोर्ट ई-मेल या हेल्प सेंटर पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही अपने सिम कार्ड सेवा प्रदाता से संपर्क कर सिम को सुरक्षित करें।
यदि ठगी के जरिए पैसे निकल चुके हैं, तो तुरंत नजदीकी साइबर थाना या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर रिपोर्ट करने से कई मामलों में रकम फ्रीज कराई जा सकती है और अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिलती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर अपराध पर पूरी तरह रोक लगाना आसान नहीं है, लेकिन जागरूकता से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी साझा करने से पहले सतर्क रहना जरूरी है। ओटीपी, पिन, पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें, चाहे वह कितना ही करीबी क्यों न हो। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां हर काम ऑनलाइन हो रहा है, वहीं साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हर नागरिक की है। थोड़ी-सी सावधानी और सतर्कता अपनाकर व्हाट्सएप हैकिंग और ऑनलाइन ठगी से खुद को और अपने परिचितों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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