— गांधी नगर के नए सचिवालय के नर्मदा हॉल में डॉक्टर ख्याति पुरोहित शाह की पुस्तक का लोकार्पण
: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेल के हाथों हुआ लोकार्पण
गरीब दर्शन / पटना – गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर के हाथों अहमदाबाद की पत्रकार, अध्यापिका डॉ. ख्याति पुरोहित शाह की पुस्तक ‘ मुझमें मिथिला बस गया – मिथिलांचल डायरी ’ का लोकार्पण कार्यक्रम गुरुवार को गांधीनगर नए सचिवालय के नर्मदा हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि साहित्य में अभिव्यक्ति की विशेष शक्ति होती है। जब सार्वजनिक अभिव्यक्ति की सीमाएँ पार हो जाती हैं, तो लेखक की आवाज़ और भी बुलंद हो जाती है और जनचेतना के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलती हैं। मुख्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि ‘ मुझमें मिथिला बस गया ‘ पुस्तक यात्रा साहित्य है। यह पुस्तक हमारी भाषा के यात्रा साहित्य की विरासत का प्रमाण है। ऐतिहासिक स्थलों की प्रत्यक्ष यात्रा का विशेष महत्व होता है। जब भी हम महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थानों पर जाते हैं, तो यात्रा के साथ-साथ हमें अपनेपन का एहसास भी होता है। हर जगह अनुभव का एक अनूठा माध्यम है। इस अनुभव को लेखिका ने पुस्तक में बखूब अभिव्यक्त किया है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्रीधर पराड़कर ने कहा कि जब कोई लेखक विशेष महत्व के स्थानों या इतिहास का भ्रमण करके अपनी रचना करता है, तो इससे तथ्यों की समझ के साथ – साथ आम आदमी की समझ भी विकसित होती है। डॉ. पुरोहित द्वारा लिखित पुस्तक ‘ मुझमें मिथिला बस गया ‘ भी साहित्य की ऐसी ही एक कृति है। डॉ. ख्याति ने बिहार और नेपाल के हर स्थान को अपनी आंखों से नहीं बल्कि दिल से देखा और जिया है, उसका संवेदनशील और सटीक वर्णन इस पुस्तक में व्यक्त किया गया है। कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा वर्ष 2022 में आयोजित साहित्य संर्वधन यात्रा के लिए भारतभर से लगभग तेरह लोग, जिनमें लेखक, पत्रकार और साहित्यकार को पसंद किया गया था, उसमें अहमदाबाद की ख्याति पुरोहित का भी समावेश हुआ था। इस यात्रा में डॉ ख्याति ने ‘ रामसर्किट ’ के अंतर्गत बिहार और नेपाल के उन स्थानों की यात्रा की थी, जहां माता सीता और प्रभु श्रीराम के जीवन से जुडें प्रसंगों का वर्णन रामायण में मिलता है। हलेश्वरधाम – जहां से राजा जनक ने हलेष्ठी यज्ञ के बाद हल जोतते बढ़े, इसी क्रम में पुनौरा धाम ( पुण्यारण्य वन ) करंडिये में माता सीता बाल स्वरूप में धरती से अवतरित हुई थीं। सीतामढ़ी – राजा जनक और महारानी सुनयना बाल सीता को लेकर सबसे पहले आए थे। गिरिजामंदिर (फूलहर) – जहां माता सीता शंकर भगवान की पूजा करने जाती थी। जहां प्रभु श्रीराम के साथ उनके सर्वप्रथम नेत्रमिलन हुए थे। धनूषा ( नेपाल ) – जहां प्रभु श्रीराम ने सीता – स्वयंवर के लिए धनूष तोड़ा था। जनकपुर महल – जहां माता सीता और प्रभु श्रीराम का विवाह हुआ था। पंथपाकड़ – जहां विवाह के बाद प्रभु श्रीराम और माता सीता ने पहली रात विश्राम किया था। अहिल्या स्थान – जहां प्रभु श्रीराम ने जडवत् हुई माता अहिल्या का उद्धार किया था। इसके अतिरिक्त डॉ ख्याति ने दरभंगा स्थित श्यामामाई मंदिर का भी दौरा किया था। जहां समशान-भूमि पर माता का मंदिर है, जहां लोग मांगलिक प्रसंगों पर माता के आशीर्वाद के लिए जाते है। बताया गया कि लेखिका डॉ. ख्याति पत्रकार और अध्यापिका के रूप में विविध कॉलेज और विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा साहित्य और पत्रकारिता पढ़ातीं हैं। साथ ही ऑल इन्डिया रेडियो (आकाशवाणी) अहमदाबाद में न्यूजरीडर के रूप में सेवाएं दे रहीं हैं और ‘ मन की बात ’ कार्यक्रम के अनुवाद-कार्य से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा वे भारत सरकार एवं गुजरात सरकार के द्वारा निर्मित हो रहे म्युजियम्स के लिए कन्टेन्ट, फिल्म स्क्रिप्ट लिखतीं हैं। साथ ही वे अखिल भारतीय साहित्य परिषद, कर्णावती महानगर इकाई के मंत्री और गुजरातप्रांत में कार्यकारिणी के रूप में सेवाएं प्रदान कर रहीं हैं। वर्ष 2003 में ‘ काकासाहब कालेलकर राष्ट्रीय पत्रकार सम्मान ’ से उन्हें दिल्ली में सम्मानित किया गया था।

