नहीं रहे 116 वर्षीय वयोवृद्ध समाजसेवी पंडित जगरूप मिश्र, क्षेत्र में शोक की लहर
गरीब दर्शन / अरेराज –
अरेराज प्रखंड के मंगुराहा दामोदरपुर पंचायत अंतर्गत कौवाहा गाँव के निवासी 116 वर्षीय वयोवृद्ध समाजसेवी पंडित जगरूप मिश्र का शनिवार 10 जनवरी की रात करीब 9:30 बजे उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। लंबी आयु पाकर भी सक्रिय रहने वाले इस महान व्यक्तित्व के निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘बाबा जी’ कहकर पुकारते थे उनका जाना एक युग का अंत माना जा रहा है। पंडित जगरूप मिश्र का जन्म अरेराज के कौवाहा गाँव में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे धार्मिक प्रवृत्ति के थे और वेद-शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। बचपन से ही गाँव में छोटे-मोटे धार्मिक अनुष्ठानों से समाज सेवा की शुरुआत की।
मृदुभाषी, मिलनसार और धैर्यवान स्वभाव के धनी पंडित जी समाज सेवा के ‘जीवंत कोटि’ थे। वे कहते थे, ‘समाज सेवा ही मेरा धर्म है।’ अंतिम वर्षों में भी, जब उनकी आयु 116 वर्ष हो चुकी थी, वे जरूरतमंदों को सलाह देते। उनकी सादगी ऐसी थी कि वे कभी फाइव स्टार जीवन नहीं जिए। सादा खाना, सादे वस्त्र और पैतृक मिट्टी का घर ही उनका आश्रय था। क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि बाबा जी के पास जो भी आया सबका निस्वार्थ मदद किए। उनके निधन का कारण प्राकृतिक बताया जा रहा है। शनिवार रात वे अपने कमरे में आराम कर रहे थे, जब अचानक साँस लेने में तकलीफ हुई। परिजनों ने स्थानीय चिकित्सकों को बुलाया, लेकिन वे बच न सके। निधन की सूचना मिलते ही गाँव में सन्नाटा छा गया। रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को गले लगाने वालों की कतार लग गई। दोपहर में सखवा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके नाती राजा बाबू ने दी। अंतिम यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण, सगे-संबंधी, पंचायत प्रतिनिधि और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। यात्रा के दौरान ‘बाबा जी अमर रहें’ के नारे गूँजते रहे। पंडित जगरूप मिश्र के निधन पर राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। गोविंदगंज विधायक राजू तिवारी ने कहा, ‘बाबा जी एक चलते-फिरते विश्वविद्यालय थे। उनका जाना हमारी सांस्कृतिक धरोहर का क्षय है।’ पूर्व विधायक राजन तिवारी ने शोक संदेश देते हुए कहा ‘उनके जैसे समाजसेवी दुर्लभ होते हैं।’ पूर्व विधायक सुनील मणि तिवारी, समाजसेवी रतन तिवारी, जिला परिषद अध्यक्ष ममता राय, रामबालक ठाकुर तथा गरीब दर्शन के संपादक विकाश राय ने भी शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी। गरीब दर्शन के संपादक विकाश राय ने कहा, ‘बाबा जी गरीब दर्शन के प्रेरणास्रोत थे।’ परिजनों के अनुसार, पंडित जी की पत्नी का निधन कई वर्ष पूर्व हो चुका था। वे हमेशा कहते थे, ‘मैंने जीवन में कभी धन कमाया नहीं, लेकिन लोगों के दिल जीते।’ इस निधन ने पूरे मंगुराहा क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।


