गरीब दर्शन / मोतिहारी – महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के समाजशास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. स्वेता को क्वीन’स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट, आयरलैंड में प्रतिष्ठित चार्ल्स वॉलेस फैलोशिप के तहत विजिटिंग स्कॉलर के रूप में चयनित किया गया है। यह फैलोशिप चार्ल्स वॉलेस इंडिया ट्रस्ट द्वारा वित्तपोषित और ब्रिटिश काउंसिल द्वारा प्रशासित है, जिसका उद्देश्य भारतीय समाजशास्त्र और नृविज्ञान के विद्वानों को अनुसंधान के उत्कृष्ट अवसर प्रदान करना है।डॉ. स्वेता ने अपनी स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय से की है। उन्होंने स्वर्गीय प्रो. विनय कुमार श्रीवास्तव (पूर्व निदेशक, नृविज्ञान सर्वेक्षण संस्थान, भारत सरकार) के मार्गदर्शन में पीएचडी पूरी की, जिन्हें वह अपनी प्रेरणा स्रोत मानती हैं। उनका शोधकार्य संस्कृति और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर केंद्रित रहा है। उनकी एम.ए. थीसिस कोन्याक नागा जनजाति की खाद्य परंपराओं पर आधारित थी, जबकि उनकी पीएचडी शोध “घाट: बनारस के रिवरफ्रंट्स – एक नृविज्ञान अध्ययन” गंगा घाटों पर होने वाले सांस्कृतिक अनुष्ठानों और जल संसाधन प्रबंधन से संबंधित थी। डॉ. स्वेता के कई प्रतिष्ठित शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें “क्लासरूम में सामाजिक आंदोलनों की पढ़ाई के लिए ‘एनिमल फार्म’ का उपयोग” (टीचिंग एंथ्रोपोलॉजी), “भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और कोन्याक नागाओं की खाद्य परंपराएं” (इंडिया क्वार्टरली), “गंगा नदी की आध्यात्मिक ध्वनि: वाराणसी के दैनिक जीवन में प्रदूषण और पवित्रता से परे” (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली से प्रकाशनाधीन) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वह शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए 8 जिलों के 66 स्कूलों में फील्ड सर्वेक्षण परियोजना का नेतृत्व कर रही हैं। साथ ही, वह “मोतिहारी के मोतीझील का नृविज्ञान अध्ययन: सतत पुनर्जीवन के लिए नीतियाँ और संभावनाएँ” नामक विश्वविद्यालय-प्रायोजित परियोजना पर भी कार्य कर रही हैं। इस प्रतिष्ठित फैलोशिप के अंतर्गत, डॉ. स्वेता मोतिहारी और बेलफास्ट (आयरलैंड) में जल साक्षरता, नीतिगत एकीकरण और समुदाय की भागीदारी पर तुलनात्मक अध्ययन करेंगी। उनका यह शोध जल प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव, सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राओं ने डॉ. स्वेता को इस प्रतिष्ठित उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है और वैश्विक मंच पर इसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है। डॉ. स्वेता का चयन यह दर्शाता है कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय शोध और अकादमिक उत्कृष्टता के वैश्विक मानकों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। उनकी यह उपलब्धि अन्य शोधार्थियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।

