हरसिद्धि का ढोलकवा : बाइक मिस्त्री से माफिया सरगना और मुखिया पति तक की कहानी
यूपी के माफिया विधायक अतीक अहमद से तुलना
पुलिस की ‘ऑपरेशन जखीरा’ में लग्जरी गाड़ियों से लेकर हथियारों का जखीरा बरामद
सोनू कुमार / गरीब दर्शन / हरसिद्धि –
पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि प्रखंड के मुरारपुर पंचायत से उठी एक कहानी अब जिले की सियासत और अपराध जगत दोनों में सुर्खियों में है। कुख्यात अपराधी कमरूद्दीन मियां उर्फ ढोलकवा का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। बाइक मिस्त्री के रूप में करियर की शुरुआत करने वाला यह युवक, ग्लैमर और अमीरी के चक्कर में अपराध की दुनिया में कूद पड़ा और देखते-ही-देखते 21 से अधिक संगीन मामलों का आरोपी बन बैठा। अब हालिया गिरफ्तारी और उसके घर से भारी मात्रा में हथियारों व लग्जरी गाड़ियों की बरामदगी ने पुलिस-प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। कमरूद्दीन का अपराध जगत में प्रवेश कुख्यात अपराधी जितेंद्र सिंह के शागिर्द के रूप में हुआ। उस दौर में जिले में जितेंद्र और देवेंद्रनाथ दुबे गैंग की दुश्मनी जगजाहिर थी। ढोलकवा ने जितेंद्र के साथ रहते हुए दुबे गैंग के कई शूटरों का सफाया किया। लेकिन साल 1996 में जब जितेंद्र की हत्या हुई, तो कमरूद्दीन ने गैंग की कमान अपने हाथ में ले ली और अपराध की दुनिया में उसका नाम तेजी से उभरने लगा। उत्तर प्रदेश के माफिया विधायक अतीक अहमद की तरह ही ढोलकवा का अपराध और राजनीति में सफर रहा। पहले अपराधी सरगना का शागिर्द, फिर उसकी मौत के बाद खुद गैंग का लीडर। अतीक की तरह उसने भी तीन शादियां कीं और फिर अपनी तीसरी पत्नी फरजाना खातून को पंचायत उपचुनाव में मैदान में उतारा। दिल खोलकर खर्च किया, लोकप्रियता हासिल की और चुनाव जीत गया। मुखिया पत्नी की जीत के बाद उसका दबदबा प्रशासनिक हलकों तक पहुंचने लगा। हाल ही में पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात को गुप्त सूचना मिली कि ढोलकवा के ठिकाने पर भारी मात्रा में हथियार छिपाए गए हैं। ‘ऑपरेशन जखीरा’ नामक गुप्त कार्रवाई में उसके घर पर छापेमारी की गई। पुलिस टीम को तहखाने में छिपाए गए जखीरे में ,पांच लाख से अधिक कीमत की कारबाइन, चार आधुनिक पिस्टल (कीमत लगभग 1 लाख प्रत्येक),रायफल,सैकड़ों जिंदा कारतूस और कई मैगजीन तथा सात लग्जरी वाहन सहित, कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। पूछताछ में ढोलकवा ने कबूल किया कि उसने इतनी बड़ी संख्या में हथियार अपनी जान की सुरक्षा के लिए जमा किए थे, क्योंकि दुश्मनों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से उसे खतरा था। हालांकि पुलिस का मानना है कि यह जखीरा केवल आत्मरक्षा के लिए नहीं बल्कि अपराधी गतिविधियों के संचालन के लिए भी इस्तेमाल होता था। सूत्रों का कहना है कि गुप्तचर एजेंसियों ने खास हिदायत दी थी कि इस अभियान की भनक स्थानीय पुलिस तक भी न पहुंचे। यही कारण रहा कि छापेमारी पूरी तरह गुप्त रखी गई और ऑपरेशन के दौरान पुलिस को हथियारों का विशाल भंडार हाथ लगा। सूत्रों के अनुसार, ढोलकवा की मदद करने वालों में कुछ सफेदपोश और वर्दीधारी भी शामिल रहे हैं। अब उनकी भूमिका की जांच भी जिला पुलिस कप्तान के रडार पर है। थानाध्यक्ष अरविंद कुमार सिन्हा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। ढोलकवा की गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। लोग इसे हरसिद्धि के इतिहास में पुलिस की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहे हैं। वहीं, पंचायत राजनीति में उसकी पत्नी की स्थिति और प्रशासनिक पहुँच पर अब सवाल उठने लगे हैं। यह पूरी कहानी बताती है कि कैसे एक साधारण युवक, गलत महत्वाकांक्षा और अपराधियों की संगत में पड़कर, बाइक मिस्त्री से माफिया सरगना और मुखिया पति बन गया।

