मोतिहारी में बेलगाम अफसरशाही
एक पदाधिकारी पर रेप और जबरन गर्भपात का केस
दूसरे पर सरकारी कार्यालय पर कब्जे की कोशिश का आरोप
गरीब दर्शन / मोतिहारी :
पूर्वी चंपारण में प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरशाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले दो दिनों के भीतर जिले के दो पदाधिकारियों के खिलाफ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने सरकारी मर्यादा, नियम और कानून व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।एक ओर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी पर यौन शोषण, जबरन गर्भपात और प्रताड़ना का मामला दर्ज हुआ है, वहीं दूसरी ओर जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी पर सरकारी कार्यालय में जबरन कब्जे की कोशिश का आरोप लगा है।
पहला मामला मोतिहारी महिला थाना कांड संख्या 47/26, जो 13 मई 2026 को दर्ज हुआ है जो जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।प्राथमिकी के अनुसार आरोपी अप्पू कुमार उर्फ प्रभाकर, जो कोटवा प्रखंड में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, पर एक छात्रा ने शादी का झांसा देकर तीन वर्षों तक यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। पीड़िता, जो भागलपुर की निवासी बताई जा रही है और पटना में पढ़ाई कर रही थी, ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसके साथ दो बार जबरन गर्भपात कराया। इसके अलावा मारपीट, बंधक बनाकर रखने और सिगरेट से दागने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। घटना का मुख्य स्थल मोतिहारी के अगरवा मोहल्ले स्थित एक कमरा बताया गया है। महिला थाना में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 69, 126(2), 127(2), 89, 91, 115(2), 352 एवं 351(2)(3) लगाई गई हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर शुक्रवार को जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी ज्ञानेश्वर प्रकाश पर सरकार द्वारा संचालित प्रेस क्लब भवन में चल रहे निर्वाचन विभाग के सहायक कार्यालय (टोल फ्री नंबर कार्यालय) पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने के प्रयास का आरोप लगा है।
बताया जा रहा है कि कुछ पत्रकार भी उनके साथ उक्त कार्यालय तक पहुंचे। आरोप है कि कार्यालय में रखी कुर्सियों पर बैठकर तस्वीरें खिंचवाई गईं और कार्यालय का कार्य प्रभावित हुआ। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रेस क्लब, मोतिहारी की टीम ने जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी से मुलाकात की। ज्ञात हो कि प्रेस क्लब भवन को सरकारी कार्यालयों से खाली कराने को लेकर प्रेस क्लब, मोतिहारी के शिष्टमंडल ने 28 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद जिलाधिकारी ने जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी को भवन खाली कराने की जिम्मेदारी दी थी। हालांकि चार महीने बीतने के बावजूद भवन खाली नहीं कराया जा सका। प्रेस क्लब प्रतिनिधियों का आरोप है कि अपनी प्रशासनिक विफलता छुपाने के लिए जिला जनसंपर्क पदाधिकारी ने खुद ही कानून हाथ में लेने जैसा कदम उठाया। प्रेस क्लब टीम के अनुसार, जब वे इस मामले में उनसे मिलने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि “हमने तो जबरन कब्जा कर लिया है, अब पत्रकार साथी वहीं जाकर बैठें, तभी भवन खाली होगा।” दोनों घटनाओं के बाद जिले में प्रशासनिक कार्यशैली और पदाधिकारियों के आचरण पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर महिला उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों से प्रशासन की छवि धूमिल हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों को लेकर विवाद ने सरकारी मर्यादा और कानून पालन की स्थिति पर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

