भय, दहशत व अनहोनी की आशंका से आशंकित जिले के कल्याणपुर अंचल की महिला राजस्व अधिकारी

एक साजिश के तहत धोखाधड़ी से आधार कार्ड प्राप्त करने की साजिश में शामिल आरोपियों के विरुद्ध सुशासन की पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के 41 दिन बाद भी नहीं की कोई कारवाई

 भय, दहशत व अनहोनी की आशंका से आशंकित जिले के कल्याणपुर अंचल की महिला राजस्व अधिकारी ने पुनः शिकायत पत्र मेल करके थाना के अनुसंधानकर्ता एवं एसपी से लगाई न्याय की गुहार 

चहुंओर चर्चा का बाजार गर्म है कि “यह जो पैसा है ना जनाब चुप रहकर भी बहुत कुछ बोलता है, किसी की बोलती बंद करता है तो किसी की पोल खोलता है” सुशासन की पीट रही भद्द

गरीब दर्शन / पटना –
जिले के कल्याणपुर अंचल की महिला राजस्व अधिकारी श्रीमति अलका अनु भय, दहशत व अनहोनी की आशंका से आशंकित होते हुए भी सुशासन की सरकार में अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी कर रही है। तकरीबन 41 दिन पूर्व दर्ज प्राथमिकी में श्रीमति अनु ने में एक साजिश के तहत धोखाधड़ी से आधार कार्ड प्राप्त करने की साजिश में शामिल होने एवं लोक सेवक को डराने – धमकाने के आरोप में अंचल क्षेत्र के जाने – माने व्यवसायी पासपोर्ट धारक मदन चौधरी, मंजय कुमार, जितेन्द्र कुमार सिंह, बिट्टू कुमार उर्फ प्रवीण कुमार समेत चार व अन्य अज्ञात के विरुद्ध संबंधित थाना में दिनांक 07/08/2025 को शिकायत पत्र दी थी जिसके आलोक में दिनांक 08/8/2025 को थानाध्यक्ष द्वारा कांड संख्या 309/25 बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस के वरीय अधिकारी अपने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में लिखे है कि कांड संख्या 309/25 में मदन चौधरी की संलिप्तता नहीं है जो न्याय का गला घोंटने के बराबर है। इससे एफआईआर की विश्वसनीयता पर हीं प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा हो रहा है। उन्होंने एसपी को आवेदन देते हुए दर्ज काण्ड संख्या की अपने स्तर से फिर से पर्यवेक्षण कराने की मांग की है। साथ ही उक्त कांड की तकनीकी पहलुओं की जांच साइबर एक्सपर्ट से कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मदन चौधरी ने निवास प्रमाण पत्र हेतु जो फर्जी आधार कार्ड लगाया था जिसके आधार पर आरटीपीएस कार्यालय से निवास प्रमाण पत्र निर्गत किया गया था जिससे मदन चौधरी द्वारा नए आधार कार्ड के लिए आवेदन करने में इस्तेमाल किया गया है। संलग्न पूर्व के आधार कार्ड एवं पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि में भारी अंतर को लेकर राजस्व अधिकारी ने उस आवेदन को आवेदक को नोटिस देने के बाद निरस्त कर दिया था। हालांकि निवास प्रमाण पत्र के सम्बन्ध में आवेदक मदन चौधरी ने राजस्व अधिकारी के नोटिस का जवाब देते हुए आवेदन करने से इनकार किया है तथा कहा है कि मैने निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं किया था किन्तु यहां यह गहन जांच का विषय है कि उक्त निवास प्रमाण पत्र किस आईडी से डाउनलोड किया गया है तथा आधार कार्ड किसका था, जिसे निवास प्रमाण पत्र निर्गत कराने हेतु इस्तेमाल किया गया।इसकी जांच के बाद हीं अन्य तथ्यों की जानकारी प्राप्त हो सकती है। उन्होंने कहा है कि इस मामला में कई अन्य बिंदुओं पर सूक्ष्मता एवं गहनता से पुलिस जांच नहीं कर रही है। इस घटना को लेकर लोगों में चर्चा का बाजार गर्म है “यह जो पैसा है ना जनाब चुप रहकर भी बहुत कुछ बोलता है, किसी की बोलती बंद करता है तो किसी की पोल खोलता है”। बहरहाल अब यहां यह यक्ष प्रश्न मुँहबाये खड़ा है कि जब शिकायत पत्र संबंधी आवेदन 07/8/25 को दी गई थी तो प्राथमिकी 08/8/25 को क्यों किया गया ? तत्पश्चात व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर तरह-तरह के मैसेज एवं व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी मिलने के बाद श्रीमती अनु ने कल्याणपुर थाना में 01/9/25 को विभिन्न मैसेज की कॉपी एवं स्टेशन डायरी करने हेतु एक आवेदन एवं मोबाइल नंबर जिससे उन्हें धमकी दी गई थीं सहित अन्य डिटेल्स थानाध्यक्ष सह अनुसंधानकर्ता को संलग्न करके दिया था जिसके आधार पर स्टेशन डायरी एस डी 6 नंबर 7225/25 दिनांक 01/08/25 को दर्ज किया गया है जबकि शिकायत पत्र 1/9/25 को दी गई थी। किन्तु परिणाम अबतक वहीं ढाक के तीन पात रहे हैं। राजस्व अधिकारी से पुलिस द्वारा करीब 16 रोज बाद भी व्हाट्सएप कॉल करने वाले आरोपी के विरुद्ध कारवाई से संबंधित जानकारी साझा नहीं किया गया है। परिणामस्वरुप श्रीमती अनु ने अनुसंधानकर्ता एवं पुलिस कप्तान को एक मेल करके शिकायत पत्र देते हुए अनुरोध किया है कि मुझे आपके थाने की उपरोक्त स्टेशन डायरी संख्या का विवरण अपडेट करें। चूंकि स्टेशन डायरी संख्या जो एफआईआर संख्या से जुड़ी हुई है और यह मामला मेरे लिए संवेदनशील है क्योंकि यह सीधे मेरे कार्यालय से जुड़ा हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि स्टेशन डायरी के लिए थाने में दिए गए मेरे आवेदन में उल्लिखित मोबाइल नंबर एफआईआर एवं एफआईआर में नामित व्यक्तियों से जुड़ा है। अतः उपरोक्त स्टेशन डायरी और एफआईआर संख्या दोनों की प्रक्रिया को अपडेट किया जाए। जब इस बाबत अनुसंधानकर्ता थानाध्यक्ष से उनके सरकारी मोबाइल नंबर पर बात करने की कोशिश की तो रिंग होने के बावजूद भी फोन रिसीव नहीं हो सका है।

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