देश में पहली बार बिहार के रक्तदानियों ने राज्य से बाहर वाराणसी में किया शिविर आयोजित

अद्वितीय आयोजन : देश में पहली बार बिहार के रक्तदानियों ने राज्य से बाहर वाराणसी में किया शिविर आयोजित

 कैंसर मरीजों के लिये किया सामुहिक प्लेटलेट्स दान

 

 पुपरी निवासी अतुल कुमार के नेतृत्व में आयोजित शिविर में बिहार के 21, यूपी के 15 तथा दिल्ली के 02 रक्तदानियों समेत कुल 38 रक्तदानियों ने प्लेटलेट्स का दान कर रच दिया इतिहास

बाल्मीकि कुमार / गरीब दर्शन / सीतामढ़ी : देश में प्रथम बार बिहार के रक्तदानियों ने राज्य से बाहर वाराणसी में एसडीपी ( सिंगल डोनर प्लेटलेट्स ) रक्तदान शिविर का आयोजन कर एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। एसडीपी डोनर्स ग्रुप, बिहार के अध्यक्ष पुपरी, सीतामढ़ी निवासी अतुल कुमार के नेतृत्व में होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल, वाराणसी में 25 जुलाई रविवार को आयोजित हुये शिविर में बिहार के 21, यूपी के 15 तथा दिल्ली के 02 रक्तदानी जिसमें 01 महिला रक्तवीरांगना भी शामिल थी, समेत कुल 38 रक्तदानियों ने मानवता एवं सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुये अपना प्लेटलेट्स दान किया। ग्रुप की यह उपलब्धि कैंसर मरीजों की जीवन बचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक कदम है। बिहार के विभिन्न जिलों से स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक संगठन तथा समर्पित रक्तदानियों ने एक मंच पर आ कर सेवा का अनोखा मिसाल कायम किया है। यह शिविर केवल रक्तदान का ही कार्यक्रम नही बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी, समर्पण, एकता और मानवीय संवेदना का प्रतीक बन गया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब समाज सेवा का संकल्प मजबूत हो तो राज्य की सीमाएं भी छोटी पड़ जाती है। ग्रुप के अध्यक्ष अतुल कुमार ने जानकारी देते हुये बतलाया कि एसडीपी डोनेशन एक खास तरह की प्रक्रिया है जिसमें विशेष मशीन के द्वारा रक्तदानी के शरीर से रक्त निकाला जाता है। इस मशीन के जरिए निकाले गए रक्त से प्लेटलेट्स निकाल कर संग्रहित कर लिया जाता है और शेष रक्त पुनः वापस रक्तदान करने वाले के शरीर में चढ़ा दिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत एक रक्तदानी के रक्त से तीन सौ से साढ़े तीन सौ मिलीलीटर तक प्लेटलेट्स संग्रह होता है। सामान्यतः इतना प्लेटलेट्स संग्रह करने के लिये पाँच से छह रक्तदानियों की आवश्यकता होती है। प्लेटलेट्स का उपयोग ज्यादातर कैंसर, डेंगू सहित अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है। एसडीपी डोनेशन में एक घंटे के आसपास समय लगते हैं जिसके पूर्व रक्तदानी को निर्धारित कड़ी जाँच प्रक्रिया से गुजरनी होती है। उन्होंने कहा कि यह शिविर आने वाले समय में पूरे देश के लिये प्रेरणा व संदेश देने का कार्य करेगी और अधिक से अधिक लोग एसडीपी डोनेशन के लिये आगे आयेंगे। शिविर में प्लेटलेट्स दान करने वाले सोनी कुमार वर्मा, अविनाश सिंह बादल, रजनीश वत्स, अनीश केशरी, दीपक सिंह चौहान, रौशन कुमार सिंह, प्रशांत भारद्वाज, अमरजीत कुमार, आमोद कुमार शेखावत, गणेश कुमार भगत, आरज़ू आरुफ आदि युवा तथा शिविर में टीम लीडर की सक्रिय भूमिका निभा रही सीतामढ़ी जिला निवासी स्मिता वर्षा झा व सहयोगी प्रिया सिंह ने कहा कि यह शिविर न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में स्वैच्छिक प्लेटलेट्स दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम मानी जायेगी। शिविर की सब से विशेष बात बिहार सीआईडी ( एफएसएल ) के डायरेक्टर विपिन चौधरी का पटना से चल कर शिविर में प्लेटलेट्स दान करना रहा जिसने रक्तदानियों के बीच उत्साहवर्धन का कार्य किया। ग्रुप के अध्यक्ष अतुल कुमार ने शिविर के सफल आयोजन के लिये बिहार, यूपी एवं दिल्ली के रक्तदानियों को साधुवाद दिया तथा वाराणसी व आसपास के जिलों के सहयोगी संस्थाओं के समस्त सेवादार व रक्त केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अक्षय बत्रा के प्रति भी आभार प्रकट किया जिन्होंने देश मे प्रथम बार इस प्रकार के आयोजन को सफल बनाने में अपना हर सम्भव महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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