बिना पोल के भेज रहे बिजली बिल सिंचाई को तरस रहा किसान
कृषि फीडर योजना पर सवाल विभागीय लापरवाही से किसान परेशान
गरीब दर्शन /हरसिद्धि /मोतिहारी ।
सरकार एक ओर किसानों को निर्बाध बिजली देकर सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत विभागीय लापरवाही की पोल खोल रही है। मामला अरेराज अनुमंडल के हरसिद्धि प्रखंड अंतर्गत धवही गांव का है, जहां एक किसान वर्षों से खेत में लगे बोरिंग का बिजली कनेक्शन चालू कराने के लिए विभागीय दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर है।
बताया जाता है कि गांव निवासी किसान निरंजन प्रसाद सिन्हा को कृषि कार्य के लिए वर्ष 2020 में ही बिजली कनेक्शन स्वीकृत किया गया था। विभाग द्वारा मीटर भी लगा दिया गया, लेकिन आज तक वहां बिजली पोल और लाइन की व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन कनेक्शन कागजों में चालू है, लेकिन खेत तक बिजली पहुंच ही नहीं सकी।
सबसे हैरानी की बात यह है कि बिना बिजली आपूर्ति के ही विभाग लगातार बिजली बिल भेज रहा है। किसान का आरोप है कि कई बार लिखित शिकायत देने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
किसान निरंजन प्रसाद सिन्हा बताते हैं कि खेती पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है। बिजली सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी संसाधनों और डीजल पंप के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि जब खेत तक बिजली पहुंची ही नहीं, तो आखिर किस बात का बिल भेजा जा रहा है।
*कृषि फीडर योजना के दावों पर उठे सवाल*
बिहार सरकार द्वारा किसानों को अलग कृषि फीडर के माध्यम से निर्धारित समय तक निर्बाध बिजली आपूर्ति देने की योजना चलाई जा रही है। इसके तहत गांवों में कृषि कार्य के लिए अलग लाइन और बेहतर बिजली व्यवस्था का दावा किया जाता है। लेकिन धवही गांव का मामला इन दावों की वास्तविक स्थिति सामने ला रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग कागजों में कनेक्शन दिखाकर अपनी उपलब्धि गिना रहा है, जबकि खेतों तक न पोल पहुंचा है और न बिजली। ऐसे में किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बजाय परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
*बढ़ती खेती लागत से किसान बेहाल*
पहले ही खाद, बीज और डीजल की बढ़ती कीमतों से किसान परेशान हैं। ऊपर से बिजली व्यवस्था में लापरवाही ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो सिंचाई के लिए सस्ती और नियमित बिजली उपलब्ध होना खेती की लागत कम करने के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन कई क्षेत्रों में आज भी किसान बिजली कनेक्शन होने के बावजूद सुविधा से वंचित हैं।
*स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न*
मामले में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय विद्युत अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहा है। आखिर बिना पोल और लाइन के कनेक्शन कैसे जारी कर दिया गया ? वर्षों तक शिकायतों के बावजूद समाधान क्यों नहीं हुआ ? और जब बिजली आपूर्ति हुई ही नहीं तो उपभोक्ता को बिल किस आधार पर भेजा जा रहा है ?
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण किसान मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान हैं। लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा तत्काल पोल-लाइन लगाकर बिजली आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है।

