ट्रेन से आते ई-रिक्शा से गांव पहुंचते फिर पैदल सरेह के रास्ते करते थे डकैती : सीतामढ़ी के मंसूरी गिरोह का पर्दाफाश

ट्रेन से आते ई-रिक्शा से गांव पहुंचते फिर पैदल सरेह के रास्ते करते थे डकैती : सीतामढ़ी के मंसूरी गिरोह का पर्दाफाश

15.50 लाख नकद,पिस्टल-कारतूस व चरस बरामद

डकैती के पैसे से खरीदी R15, 30 लाख की जमीन का किया था इकरार

गरीब दर्शन / मोतिहारी।

पूर्वी चंपारण के सिकरहना अनुमंडल में लगातार डकैती की वारदातों से पुलिस की नींद उड़ाने वाले शातिर मंसूरी डकैत गिरोह का आखिरकार पर्दाफाश हो गया। कई महीनों से गिरोह के पीछे लगी एसआईटी ने सीतामढ़ी से जुड़े अंतरजिला गिरोह के चार अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह की कार्यशैली इतनी शातिर थी कि अपराधी न मोबाइल फोन इस्तेमाल करते थे और न ही अपनी गाड़ी लेकर चलते थे। ट्रेन से आते, ई-रिक्शा से गांव तक पहुंचते और वहां से पैदल सरेह के रास्ते घटनास्थल तक जाते थे। वारदात के बाद भी इसी रास्ते से लौटकर ट्रेन पकड़ लेते थे।
पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों की निशानदेही पर 15.50 लाख रुपये नकद, पिस्टल, चार कारतूस, 2.107 किलो चरस जैसा मादक पदार्थ, चांदी के जेवरात, पांच मोबाइल, लोहे का रॉड और मोटरसाइकिल बरामद की है। डकैती की रकम से खरीदी गई R15 बाइक भी पुलिस के हाथ लगी है। गिरोह ने डकैती की कमाई से करीब 30 लाख रुपये की जमीन खरीदने के लिए इकरार भी किया था।

13 अप्रैल से शुरू हुआ था डकैती का सिलसिला
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने सिकरहना अनुमंडल क्षेत्र में पहली डकैती 13 अप्रैल को की थी। इसके बाद अलग-अलग इलाकों में कुल पांच डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया गया। ढाका थाना क्षेत्र के मठिया मोहन गांव में 30 अगस्त की रात मनोज कुमार शर्मा के घर हुई डकैती के बाद पुलिस ने जांच को और तेज किया। अनुसंधान में सामने आया कि घटनाओं के पीछे सीतामढ़ी के बेला, परिहार, बथनाहा और मेहसौल क्षेत्र से जुड़े अपराधियों का हाथ है। गिरोह का संपर्क नेपाल से भी था।

एक गिरफ्तारी ने खोला पूरा नेटवर्क
जांच के दौरान पुलिस को बथनाहा थाना क्षेत्र के भलही निवासी मो. सफीक मंसूरी उर्फ बन्ठा के बारे में महत्वपूर्ण सूचना मिली। वह पहले भी डकैती के मामले में जेल जा चुका था और हाल में जेल से बाहर आया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पुलिस पहुंची और चार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, सफीक मंसूरी का आपराधिक इतिहास लंबा है। उसके खिलाफ सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण समेत विभिन्न जिलों में डकैती, चोरी, गृहभेदन, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। गिरफ्तार अन्य अपराधियों का भी कई कांडों में आपराधिक इतिहास सामने आया है।

मोबाइल और गाड़ी से बनाई दूरी
गिरोह की सबसे बड़ी चुनौती पुलिस के लिए उसका वारदात का तरीका था। अपराधी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे। किसी वाहन से सीधे घटनास्थल तक पहुंचने के बजाय ट्रेन से इलाके में आते थे। फिर ई-रिक्शा से गांव के आसपास तक पहुंचते और आगे का रास्ता पैदल सरेह से तय करते थे। इससे मोबाइल लोकेशन और वाहन के आधार पर उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता था। कई महीनों की निगरानी और तकनीकी व मानवीय सूचना तंत्र के बाद पुलिस गिरोह तक पहुंच सकी।

परिवार के कई सदस्य अपराध की दुनिया में
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बथनाहा क्षेत्र से जुड़े मंसूरी गिरोह का आपराधिक नेटवर्क काफी पुराना है। पुलिस के अनुसार, गिरोह से जुड़े परिवार के कई सदस्य डकैती समेत आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। गिरफ्तार अपराधियों के खिलाफ सीतामढ़ी, दरभंगा और पूर्वी चंपारण के विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज हैं। गिरोह के नेपाल कनेक्शन और नेपाल के दो संदिग्ध अपराधियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
डकैती की कमाई से बाइक, जमीन खरीदने की तैयारी
गिरोह के अपराधियों ने डकैती से हासिल रकम को महंगे शौक और संपत्ति में लगाने की तैयारी शुरू कर दी थी। पुलिस के अनुसार, लूट की रकम से R15 बाइक खरीदी गई, जबकि करीब 30 लाख रुपये की जमीन के लिए इकरार किया गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक डकैती से कितनी संपत्ति अर्जित की है और रकम कहां-कहां लगाई गई है।

चार गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
गिरफ्तार अपराधियों में मो. सफीक मंसूरी उर्फ बन्ठा, मो. तनवीर शेख, शंभु पासवान उर्फ मोगल और अमरनाथ ठाकुर शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी, हथियार, मादक पदार्थ और जेवरात बरामद किए हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी और नेपाल कनेक्शन की जांच के लिए कार्रवाई जारी है।

टीम को मिलेगा 30 हजार का पुरस्कार
गिरोह के उद्भेदन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीम को 30 हजार रुपये की पुरस्कार राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। कार्रवाई में सिकरहना एसडीपीओ अभिषेक कुमार, ढाका थानाध्यक्ष राजरूप राय, कुंडवाचैनपुर थानाध्यक्ष, चिरैया थानाध्यक्ष, घोड़ासहन थानाध्यक्ष तथा मोतिहारी और सीतामढ़ी डीआईयू की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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