तिरंगा मार्च के बाद अभिजीत दीपके को जमानत नेहा बोरा रिहा
दिल्ली में सुरक्षा रही सख्त
गरीब दर्शन / नई दिल्ली
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में शुक्रवार से जारी घटनाक्रम में शनिवार शाम तक बड़ा अपडेट सामने आया। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जमानत दे दी। अदालत ने उनकी रिहाई के लिए बांड भरने का निर्देश दिया। वहीं, अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए) की अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह हिरासत से रिहा कर दिया गया था।
कनॉट प्लेस में शुक्रवार को आयोजित मार्च के दौरान पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखा गया। इसके बावजूद राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इनर सर्कल और आसपास के इलाकों में पहुंचे। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो हजार लोग तिरंगा लेकर जुटे, जबकि अन्य रिपोर्टों में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी बताई गई। मार्च के दौरान पुलिस ने अभिजीत दीपके, नेहा बोरा समेत करीब 100 से 150 लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस ने दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई की। शनिवार को उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से जमानत मिलने की खबर सामने आई। नेहा बोरा को हिरासत संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सुबह रिहा कर दिया गया। सीजेपी और उससे जुड़े छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन राजनीतिक पक्षपात के आधार पर नहीं किया गया है और पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वा सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा के उल्लंघन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में कार्रवाई की बात कही है। पुलिस प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। शनिवार को कनॉट प्लेस सहित मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई। अभिजीत दीपके को जमानत मिलने और नेहा बोरा की रिहाई के बाद भी इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी रही।

