रिजीम चेंज बयान पर भाजपा का पलटवार नितिन नवीन और रिजिजू ने विपक्ष को घेरा

रिजीम चेंज बयान पर भाजपा का पलटवार नितिन नवीन और रिजिजू ने विपक्ष को घेरा

गरीब दर्शन/नई दिल्ली।

‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की चर्चा को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह चुनाव सुधार और युवाओं के भविष्य के बजाय अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत बांग्लादेश नहीं है और देश का भविष्य यहां की जनता तय करती है। नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा को उजागर करता है। उन्होंने दावा किया कि विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा अध्यक्ष ने इसे कथित तौर पर शहरी नक्सल एजेंडे से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता से। उन्होंने कहा कि देश की जनता विकास और स्थिरता के साथ आगे बढ़ना चाहती है। इस विवाद में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “बड़े आए ‘रिजीम चेंज’ करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि भारतीय युवा देश को बनाने में जुटे हैं, न कि उसे नुकसान पहुंचाने में। उनके मुताबिक, युवा खेल, कौशल विकास, नवाचार और नए कारोबार के क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। भाजपा नेताओं के इन बयानों के बाद ‘रिजीम चेंज’ को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। भाजपा ने विपक्ष के इस शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भारत में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत चुनाव के माध्यम से पूरी होती है। नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा और देश की जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देंगे। रिजिजू ने भी दोहराया कि देश में सत्ता का भविष्य जनता के जनादेश से तय होता है। हालांकि, विपक्ष का पक्ष और ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल का पूरा संदर्भ सामने आए बिना इस विवाद की पृष्ठभूमि का आकलन अधूरा रहेगा। फिलहाल, भाजपा नेताओं के बयानों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और लोकतंत्र, चुनाव सुधार तथा सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है।

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