सावधान सोशल मीडिया की ‘आधी-अधूरी’ कानूनी सलाह पहुँचा सकती है जेल
कोर्ट में नहीं चलती फेसबुक–व्हाट्सएप की दलील
गोल्ड मेडलिस्ट एडवोकेट असीम झा की दो टूक चेतावनी
गरीब दर्शन/मोतिहारी।
डिजिटल युग में जहां हर सवाल का जवाब एक क्लिक पर मिल रहा है, वहीं सोशल मीडिया से कानूनी सलाह लेना आम लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस गंभीर विषय पर मोतिहारी सिविल न्यायालय के प्रख्यात अधिवक्ता एवं गोल्ड मेडलिस्ट एडवोकेट असीम झा ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उनका कहना है कि फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी जाने वाली अनौपचारिक और अधूरी कानूनी सलाह व्यक्ति को राहत नहीं, बल्कि सीधे जेल तक पहुंचा सकती है। एडवोकेट असीम झा ने कहा कि कानून भावनाओं, सहानुभूति या सोशल मीडिया के ‘लाइक्स’ पर नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर आधारित होता है। अक्सर लोग अपनी कानूनी परेशानी सोशल मीडिया पर साझा कर देते हैं, जहां बिना केस की फाइल, दस्तावेज या परिस्थितियों को समझे लोग राय देने लगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून की बारीकियां इतनी जटिल होती हैं कि एक ही धारा अलग परिस्थितियों में बिल्कुल उलटा परिणाम दे सकती है। उन्होंने कहा कि जो सलाह किसी एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद लग सकती है, वही दूसरे व्यक्ति के लिए बर्बादी का कारण बन सकती है। बिना पेशेवर जिम्मेदारी के दी गई सलाह पर भरोसा करना, खुद को कानूनी जाल में फंसाने जैसा है। कई मामलों में लोग सोशल मीडिया पर मिली सलाह के आधार पर पुलिस के सामने गलत बयान दे देते हैं या बिना समझे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर बैठते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें जीवन भर भुगतना पड़ता है। एडवोकेट असीम झा ने इसे एक नैतिक संकट बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की होड़ में कई लोग गंभीर कानूनी विषयों पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां कर देते हैं। भले ही यह कानूनी रूप से ‘प्रोफेशनल मिसकंडक्ट’ न हो, लेकिन नैतिक रूप से यह बेहद खतरनाक है। लोग अक्सर अपनी कहानी का सिर्फ एक पक्ष सोशल मीडिया पर रखते हैं, जिस पर मिली सलाह उन्हें और गहरे संकट में डाल देती है। सबसे अहम चेतावनी देते हुए एडवोकेट असीम झा ने कहा कि न्यायालय में सोशल मीडिया का कोई अस्तित्व नहीं है। यदि किसी व्यक्ति ने फेसबुक या व्हाट्सएप की सलाह पर गलत कदम उठा लिया, तो वह अदालत में यह नहीं कह सकता कि “मुझे ऐसा करने को सोशल मीडिया पर कहा गया था।” अदालत केवल रिकॉर्ड, प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया को ही मान्यता देती है। अंत में उन्होंने आम लोगों से अपील की कि कानूनी जानकारी और कानूनी सलाह में अंतर समझें। बिना केस की फाइल देखे दी गई सलाह से बचें और किसी भी कानूनी समस्या में केवल योग्य, अनुभवी और पंजीकृत अधिवक्ता से ही संपर्क करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया सूचना का माध्यम हो सकता है, लेकिन कानूनी समाधान का विकल्प कभी नहीं।
एडवोकेट असीम झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कानून में की गई छोटी सी गलती भी पूरे भविष्य को अंधकार में डाल सकती है। इसलिए सावधान रहें और केवल पेशेवर विशेषज्ञों पर ही भरोसा करें।”

