“वर्षा का जल राष्ट्र की ताकत: कैच द रेन अभियान”

 

गरीब दर्शन @ अजय सहाय 

“Catch the Rain” अभियान, जो भारत सरकार द्वारा जल शक्ति मंत्रालय के अधीन वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया था, का उद्देश्य वर्षा जल की एक-एक बूंद को संरक्षित करना है, ताकि भविष्य में जल संकट से देश को बचाया जा सके। प्रधानमंत्री ने इस अभियान के लिए एक स्पष्ट और प्रेरणादायक संदेश दिया: “वर्षा का जल, जब भी जहाँ भी गिरे, उसे संचित करें।” इसी संकल्पना के आधार पर यह अभियान “जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें वर्षा जल को उसके गिरने के स्थान पर ही संग्रहित किया जाए। वर्ष 2021 से 2025 तक, इस अभियान के अंतर्गत भारत में लगभग 24.8 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) वर्षा जल संग्रहित किया गया है। इसमें महाराष्ट्र (3.7 BCM), तमिलनाडु (3.1 BCM), कर्नाटक (2.9 BCM), उत्तर प्रदेश (2.5 BCM) और मध्य प्रदेश (2.3 BCM) अग्रणी राज्यों में रहे हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय क्षेत्रों ने सीमित भूमि के बावजूद 1.1 लाख से अधिक जल संरचनाएँ तैयार कीं। राजस्थान ने पारंपरिक जोहड़ और तालाबों के माध्यम से 1.4 BCM जल संग्रहीत किया, जबकि केरल, जो कि उच्च वर्षा वाला राज्य है, अपेक्षा से कम – केवल 1.2 BCM जल ही संचित कर पाया। यह स्पष्ट करता है कि केवल वर्षा का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रबंधन और संरक्षण की भी अत्यधिक आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्तर पर 2023 तक लगभग 24 लाख जल संरचनाएँ बनाई या पुनर्जीवित की गईं, जिनमें चेक डैम, रिचार्ज पिट, जलाशय, तालाब आदि शामिल हैं। परंतु इस सफलता के पीछे अनेक चुनौतियाँ भी रही हैं – सबसे बड़ा कारण है जागरूकता की कमी, विशेषकर युवाओं में। डिजिटल पीढ़ी के युवाओं को जल संरक्षण से जोड़ने के लिए सरकार ने “Youth for Water” कार्यक्रम, स्कूल और कॉलेज स्तर पर प्रतियोगिताएँ, तथा एनएसएस और एनसीसी इकाइयों के माध्यम से जागरूकता फैलाने के प्रयास किए, लेकिन इनकी पहुँच सीमित रही। शहरी क्षेत्रों में भूमि विवाद और नियोजन की कमी, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण और संसाधनों का अभाव इस अभियान की गति को धीमा करते हैं। हालांकि, बिहार ने जल संकट से निपटने हेतु अपनी राज्य स्तरीय योजना “जल जीवन हरियाली” के माध्यम से एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस योजना के तहत बिहार सरकार ने 2019 से 2024 तक 5.24 लाख जल संरचनाएँ बनाई हैं, जिनमें 1.5 लाख सोख्ता गड्ढे, 37000 कुएँ, 12000 चेक डैम, 68,000 तालाब और 1.2 लाख वर्षा जल टैंक शामिल हैं। इसके साथ ही 17.8 करोड़ पेड़ भी लगाए गए हैं, जिससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बना है, बल्कि भूजल पुनर्भरण में भी सहायता मिली है। जल जीवन हरियाली के तहत जल चौपाल, ग्राम जल पंचायतें, जल रैलियाँ, तथा स्कूलों में “वाटर वॉल” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनभागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके विपरीत, “Catch the Rain” जैसे राष्ट्रीय स्तर के अभियान को कई राज्यों ने केवल औपचारिकता तक सीमित रखा, जिससे लगभग 70% संरचनाओं की गुणवत्ता या क्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए। पंजाब, हरियाणा जैसे भूजल संकट से जूझते राज्यों ने भी इस अभियान को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी। पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मणिपुर और त्रिपुरा में पर्याप्त वर्षा के बावजूद संरचनात्मक विकास न्यूनतम रहा। अगर युवा वर्ग को तकनीकी प्रशिक्षण, जल संरचनाओं के डिज़ाइनिंग से लेकर क्रियान्वयन तक की जिम्मेदारी दी जाए और उन्हें “जल योद्धा” के रूप में उभारा जाए, तो यह अभियान एक जन आंदोलन का स्वरूप ले सकता है। डिजिटल प्लेटफार्मों पर जल संरक्षण हेतु प्रमाण-पत्र आधारित कोर्स, सोशल मीडिया अभियान, तथा जल रिपोर्टिंग जैसे नवाचारों से युवाओं को जोड़ा जा सकता है। भारत में प्रतिवर्ष औसतन 117 सेंटीमीटर वर्षा होती है, जिससे लगभग 4000 BCM जल उपलब्ध होता है, परंतु वर्तमान में उसका केवल 18–20% ही संरक्षित किया जाता है। यदि Catch the Rain अभियान के माध्यम से इस आंकड़े को 2025 तक 50 BCM तक पहुँचाया जाए, और प्रत्येक राज्य को उसके क्षेत्रफल, जनसंख्या व वर्षा औसत के आधार पर लक्ष्य दिया जाए, तो देश जल आत्मनिर्भर बन सकता है। इस दिशा में बिहार की “जल जीवन हरियाली” नीति एक रोल मॉडल है, जिससे अन्य राज्य प्रेरणा ले सकते हैं। अंततः, “Catch the Rain” अभियान एक दिशा है, पर उसकी गति तभी तेज होगी जब वह नीति से निकलकर जन भावना और जन क्रिया में बदलेगा। प्रधानमंत्री का यह वाक्य – “वर्षा का जल, जब भी जहाँ भी गिरे, उसे संचित करें” – केवल एक नारा नहीं बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा का मंत्र है, जिसे पूरे देश को आत्मसात करना होगा। तभी यह अभियान केवल रिपोर्टों तक सीमित न रहकर ज़मीन पर परिवर्तन का वाहक बन सकेगा।

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