दो दिन में सुलझे बिहार ग्रामीण बैंक के दो विवाद 8400 कर्मचारियों को मिलेगा 77.69 करोड़ का लाभ
वेतन वृद्धि, भत्ते, पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति जैसी लंबित मांगों पर बनी सहमति
गरीब दर्शन/पटना
बिहार ग्रामीण बैंक के करीब 8400 कर्मचारियों के लिए दो दिन में हुए समझौते राहत लेकर आए हैं। पटना में मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के क्षेत्रीय तंत्र की पहल पर बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच लंबे समय से लंबित दो औद्योगिक विवादों का समाधान हुआ। 22 और 23 अक्टूबर को हुए इन समझौतों से कर्मचारियों को कुल 77.69 करोड़ रुपए का वित्तीय लाभ मिलने का अनुमान है। इनमें अधिकारी संवर्ग के लिए 67.17 करोड़ और लिपिक संवर्ग के लिए 10.52 करोड़ रुपए का लाभ शामिल है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना के कार्यालय के अधीन सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) ने सुलह प्रक्रिया के जरिए दोनों विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। समझौतों का उद्देश्य कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान करने के साथ बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच औद्योगिक संबंधों को बेहतर बनाना है।
पहला समझौता 22 अक्टूबर को बिहार ग्रामीण बैंक अधिकारी संघ और बैंक प्रबंधन के बीच हुआ। इसमें कार्य-निष्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि (पीएलआई), स्थानापन्न भत्ता, वेतन वृद्धि, यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी, पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति जैसी मांगों पर सहमति बनी। इससे लगभग 8400 कर्मचारियों को करीब 67.17 करोड़ रुपए का वित्तीय लाभ मिलने की बात कही गई है।
दूसरा विवाद अगले दिन, 23 अक्टूबर को बिहार ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन और बैंक प्रबंधन के बीच सुलझा। इस समझौते में लिपिक संवर्ग की मांगों को शामिल किया गया। इनमें 12वें द्विपक्षीय समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन, मकान किराया भत्ते में वृद्धि, दिव्यांग कर्मचारियों के परिवहन भत्ते में बढ़ोतरी, ओवरटाइम का भुगतान, पदोन्नति में पारदर्शिता और वार्ता परिषद का गठन प्रमुख हैं। इससे करीब 2500 कर्मचारियों को 10.52 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा। इसमें लगभग 9.02 करोड़ रुपए का वार्षिक आवर्ती लाभ भी शामिल है।
दोनों समझौते औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत सुलह कार्यवाही के दौरान हुए। इस प्रक्रिया में बातचीत और आपसी सहमति के जरिए विवादों का समाधान किया गया। इससे लंबी मुकदमेबाजी से बचने और कर्मचारियों को समय पर राहत मिलने का रास्ता खुलता है। लगातार दो दिनों में अधिकारी और लिपिक संवर्ग से जुड़े विवादों का निपटारा श्रम विभाग की सुलह व्यवस्था की उपयोगिता को दर्शाता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करता है कि संवाद और सहमति के जरिए कर्मचारियों के हितों से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान संभव है।


