एसआईआर पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 11 विपक्षी नेता याचिका में 14 खामियां
मतदाता सूची से नाम हटाने में अनियमितताओं का आरोप, याचिका सूचीबद्ध नहीं होने से मंगलवार को नहीं होगी सुनवाई
गरीब दर्शन/नई दिल्ली
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोमवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर एसआईआर पर रोक लगाने, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, याचिका में मिली तकनीकी खामियों के कारण फिलहाल इस पर सुनवाई का रास्ता साफ नहीं हुआ है। याचिका दायर करने वालों में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सौगत रॉय, संजय राउत, सुप्रिया सुले, एमए बेबी, डी राजा, महुआ माझी और ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं। याचिका में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को पक्षकार बनाया गया है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया है। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात करने की कोशिश की थी। बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और याचिका दाखिल की।
14 खामियों के कारण अटकी याचिका
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 खामियां चिह्नित की हैं। इनमें दस्तावेजों का स्पष्ट नहीं होना, कुछ पन्नों का गायब होना, कोर्ट फीस में कमी और कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे का उपलब्ध नहीं होना शामिल है। रजिस्ट्री ने मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति भी जमा करने को कहा है। इन कमियों के दूर होने तक याचिका सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में मंगलवार को इस मामले में सुनवाई नहीं होगी। अन्य संबंधित मामलों की सुनवाई अलग-अलग तारीखों पर निर्धारित है।
एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। वहीं, चुनाव आयोग पुनरीक्षण की प्रक्रिया को वैध ठहराता रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि याचिका की तकनीकी खामियां दूर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कब सुनवाई करता है और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर क्या रुख अपनाता है।

