भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा कृभको प्रबंधन

भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा कृभको प्रबंधन

 भारत सरकार के संबंधित विभाग की नीति एवं निर्देशों का उसे नहीं परवाह, खुल रही है विभागीय कारवाई का परत- दर- परत कलई

कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पुराना प्रबंधन की हो रही है ताबड़तोड़ बैठक, लिए जा रहे नीतिगत निर्णय

— गाड़ी, बंगला,कार्यालय, भत्ता सहित अन्य सुविधाओं का लिया जा रहा लाभ, विभाग जानकर भी अनजान, तीन माह बाद भी नहीं हुआ कृभको प्रबंधन प्रशासक के हवाले

पुराना प्रबंधन द्वारा अहम पदों पर दी गई सेवा विस्तार, सेवा विस्तार पर तीन दर्जन से अधिक अधिकारी पदस्थापित, लूट की मची धूम

कार्यकाल समाप्ति सहित सेवा विस्तार एवं अन्य लिए गए नीतिगत फैसलों की प्रबंधन ने की पुष्टि

गरीब दर्शन / पटना – “तू डाल डाल, मैं पात पात”मुहावरा को अक्षरशः चरितार्थ करते हुए कृभको प्रबंधन अपनी कार्यसंस्कृति से भारत सरकार के सुशासन की हवा निकाल दी है। कृभको प्रबंधन के भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे रहने के संबंध में इन्हीं के सेवानिवृत अधिकारी संघ ने भारत सरकार के सहकारिता, कृषि एवं रसायन तथा उर्वरक मंत्रालय को बार – बार शिकायत पत्र देकर जांच कराने की गुहार लगाई किन्तु परिणाम अब तक ढाक के तीन पात मुहावरा को चरितार्थ कर रही है। संघ के अधिकारियों ने अपने शिकायत पत्र के फेहरिस्त में पश्चिम बंगाल के मालदा के एक अपने व्यापारी को उर्वरक आपूर्ति के एवज में अवैध रूप से रिश्वत लेने का आरोप विपणन निदेशक पर लगाया था। इतना ही नहीं भारत सरकार का कृभको के इक्विटी मद में 190 करोड़ रूपए जमा है किन्तु सरकार के संबंधित विभाग को तकरीबन 13-14 साल से लाभांश की करीब चार सौ करोड़ की राशि नहीं दी गई है। स्थिति की भयाहवता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कृभको के यूपी के शाहजहांपुर के पितरौला में स्थापित यूरिया प्लांट के बगल में पूर्व अध्यक्ष की मेसर्स अनन्या जिंक एंड पॉलीकॉट प्राईवेट लिमिटेड का प्लांट अवैध रूप से फल – फूल रहा है जिसकी आपूर्ति कृभको ब्रांड के नाम से बेची जा रही है क्योंकि कृभको एक लोकप्रिय ब्रांड है। अनन्या जिंक कृभको के अन्य उत्पादों के साथ धड़ल्ले से बिक्री करके अवैध रूप से मोटी रकम की कमाई की जा रही है। जबकि वर्ष 2018- 2021 में पंजाब सरकार ने उक्त जिंक का लैब टेस्ट कराया था किंतु उक्त प्रॉडक्ट मानक के अनुरूप नहीं था फिर भी जिंक की बिक्री बदस्तूर जारी है। अन्य राज्यों ने अनन्या जिंक का लैब टेस्ट नहीं कराया है। शिकायत कर्ताओं ने भारत सरकार के कृषि मंत्रालय से शिकायत की थीं कि उक्त जिंक का निर्माण मानक का घोर उल्लंघन करके किया जा रहा है। फिर भी किसानों को जिंक की आपूर्ति कर ठगा जा रहा है।हद तो यह है कि कृभको में अवैध रूप से मोटी रकम की कमाई करने हेतु कई वर्षों से प्रबंधन द्वारा प्रबंध निदेशक, विपणन निदेशक सहित कई अहम करीब चालीस पद सेवा विस्तार से चल रहा है।
अब यहां बताते चलें कि कृभको प्रबंधन के कार्यकाल समाप्त होने की तिथि के पूर्व भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सहकारी चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष के कार्यालय द्वारा एफ.सं.सीईए- 120111661/24 दिनांक 31 दिसंबर 2024 को चुनाव संबंधी एक सर्कुलर दिया गया जिसमें 05 जनवरी 2025 तक सर्कुलर में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए कृभको को निदेशक मंडल के चुनाव हेतु चुनाव अधिकारी के निर्देशन में स्वच्छ एवं पारदर्शी चुनाव कराने हेतु कहा गया। उक्त सर्कुलर में 07 जनवरी को मतगणना कराने तथा 09 जनवरी को अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव कराने की तिथि मुकर्रर की गई। कुछ गड़बड़ियों के कारण ससमय चुनाव सम्पन्न नहीं हो सका तो अब यहां यह यक्ष प्रश्न उठ खड़ा हुआ है कि जब चुनाव हुआ ही नहीं तो पुराना निदेशक मंडल की बैठक एवं उस बैठक में नीतिगत फैसला लेने का अधिकार कृभको प्रबंधन को किसने दिया? इतना ही नहीं कृभको प्रबंधन धड़ल्ले से सारी सुविधाओं का लाभ लेते हुए सेवा विस्तार, एवं नीदरलैंड की प्रतिष्ठित कंपनी फार्म फ्राइटस ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में अत्याधुनिक आलू प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए संयुक्त उद्यम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रबंधन की बैठक करने एवं नीतिगत फैसले लेने संबंधी प्रश्न के उत्तर में कृभको अध्यक्ष के ओएसडी आनंद पदालिया के मोबाईल नम्बर 9811152652 तथा उपाध्यक्ष सुधाकर चौधरी के मोबाईल नम्बर 9441114499 पर उनका पक्ष जानने हेतु सम्पर्क साधा तो जहां श्री पदालिया ने बैठक करने की पुष्टि की वहीं श्री चौधरी ने कहा कि बहरहाल कृभको का निदेशक मंडल अस्तित्व में तो नहीं है लेकिन कंपनी एवं उसकी पॉलिसी लागू करने हेतु पुराने निदेशक मंडल की बैठक की गई है ताकि कंपनी को बर्बाद होने से बचाई जा सके। उन्होंने सेवा विस्तार के संबंध में कहा कि जब समंदर के बीच में नाव चल रहा है तो चलाने वाले को देखना पड़ेगा कि वह 08 घंटे से चल रहा है तो नाव को बीच मझधार में नहीं न छोड़ा जाएगा ।साथ ही उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर जानकारी देकर ही गरीबों एवं किसानों के हित की बाबत विकास को गति देने हेतु निर्णय व कार्य कराए जा रहे हैं। अब यहां देखना यह बाकी है कि भारत सरकार का संबंधित विभाग नियमों को ताकपर रखकर मनमाने तरीके से कार्य करने पर उतारू कृभको प्रबंधन पर कारवाई करती भी है या नहीं, यह समय के गर्भ में है। साथ ही भारत सरकार का संबंधित विभाग कृभको के निदेशक मंडल के चुनाव को स्वच्छ एवं पारदर्शी तरीके से कराने हेतु प्रशासक की नियुक्ति करती भी है या नहीं।

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